असम के ये 7 सबसे प्रसिद्ध मंदिर, जो आपकी यात्रा को बना देंगे तीर्थ

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अगर आप पूर्वोत्तर भारत के हरे-भरे आंचल में बसे असम राज्य की यात्रा का मन बना रहे हैं तो इन सात प्रमुख मंदिरों के दर्शन अवश्य करें जो आपकी यात्रा को तीर्थ यात्रा में बदल देंगे

1 ) कामाख्या मंदिर :-

कामाख्या देवी शक्तिपीठ को 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यह शक्तिपीठ तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध है। हिन्दू धर्म के पुराणों के अनुसार जहां-जहां सती के अंग और धारण किए वस्त्र या आभूषण गिरे, वे देवी के शक्तिपीठ कहलाए।कामाख्या शक्तिपीठ असम की राजधानी दिसपुर के पास गुवाहाटी से 8 किलोमीटर दूर कामाख्या में है। यह 51 शक्तिपीठों में सबसे उच्च स्थान रखता है| यह मंदिर शक्ति की देवी सती का मंदिर है और यहां देवी की योनि का पूजन होता है। जो मनुष्य इस शिला का पूजन, दर्शन स्पर्श करते हैं, वे दैवी कृपा तथा मोक्ष के साथ भगवती का सान्निध्य प्राप्त करते हैं।

2 ) उमानंद भैरव का मंदिर :-

मां के मंदिर से कुछ ही दूरी पर उमानंद भैरव का मंदिर है| उमानंद देवलोई एक शिव मंदिर है जो ब्रह्मपुत्र नदी के बीच में पीकॉक द्वीप में स्थित है | यह दुनिया में सबसे छोटे बसे हुए नदी द्वीप के रूप में जाना जाता है।बताया जाता है कि उमानंद भैरव ही इस शक्तिपीठ के भैरव हैं।इनके दर्शन के बिना माता की यात्रा अधूरी मानी जाती है। यहां से ब्रह्मपुत्र नदी का नजारा अद्भुत आनंद प्रदान करता है।

3 ) महाभैरव मंदिर :-

महाभैरव मंदिर असम के तेजपुर का सबसे अधिक प्रसिद्ध मंदिर है। शहर के उत्तरी किनारे पर स्थित महाभैरव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। किवदंती है कि मूल रूप से इस मंदिर का निर्माण राक्षसों के राजा बाणासुर ने किया था। पहले यह एक पत्थर का मंदिर था जो 1897 में आये भूकंप में नष्ट हो गया था। आज जो मंदिर स्थित है वह कांक्रीट से बना हुआ है। वर्तमान संरचना का निर्माण प्रसिद्ध साधु नागा बाबा ने करवाया था। मंदिर में स्थित शिवलिंग बहुत बड़ा है।

4 ) नवग्रह मंदिर :-

नवग्रह मंदिर चित्रसल पहाड़ी पर स्थित है। नौ ग्रहों को दर्शाने के लिए मंदिर के अंदर नौ शिवलिंग स्थापित किए गए है। हर शिवलिंग अलग-अलग रंग के कपड़ों से ढंके हुए हैं। ऐसा माना जाता है कि नवग्रह मंदिर को 18वीं शताब्दी में अहोम राजा राजेश्वर सिंह और बाद में उनके बेटे रुद्र सिंह या सुखरुंगफा के शासन काल में बनवाया गया था। 1897 में इस क्षेत्र में आए भयानक भूकंप में मंदिर का काफी बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया था।हालांकि बाद में लोहे के चदरे की मदद से इसका पुननिर्माण किया गया।

5 ) शुक्रेश्वर मंदिर :-

गुवाहाटी आने वाले पर्यटकों के बीच शुक्रेश्वर मंदिर सबसे ज्यादा घूमा जाने वाला पर्यटन स्थल है। 1744 में अहोम राजा प्रामत्ता सिंह द्वारा बनवाया गया यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर में राजा राजेश्वर सिंह (1744-1751) ने भी योगदान दिया था और इस मंदिर का असम के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। गुवाहाटी के एक महत्वपूर्ण स्थान पानबाजार के पास ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित इटाखुली पहाड़ी पर बना यह मंदिर शिव पंथ को बढ़ावा देता है।

6 ) भुवनेश्वरी मंदिर :-

प्रसिद्ध भुवनेश्वरी मंदिर नीलाचल की पहाड़ी पर स्थित है। इसे भुवनेश्वरी देवी के सम्मान में बनवाया गया था। हिन्दू धर्म के अनुसार भुवनेश्वरी देवी 10 महाविद्या देवी में चौथी देवी है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 7वीं से 9वीं शताब्दी के बीच करवाया गया था। पत्थरों से बनी इस मंदिर की संरचना कामाख्या मंदिर से काफी मिलती-जुलती है और ज्यादातर पर्यटक कामाख्या से भुवनेश्वरी मंदिर के लिए चढ़ाई शुरू करते हैं। इस दौरान नीचे से बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का विहंगम नजारा देखने को मिलता है। साथ ही आप भुवनेश्वरी मंदिर से गुवाहाटी शहर का मंत्रमुग्ध कर देने वाला नजारा भी देख सकते हैं।

7 ) उगरातारा मंदिर :-

उगरातारा मंदिर को उगरो तारा मंदिर भी कहा जाता है। देवी काली को समर्पित यह मंदिर उजान बाजार स्थित जोर पुखुरी के पश्चिमी छोर पर स्थित है। उगरातारा मंदिर असम में धार्मिक आस्था का एक महत्वपूर्ण केन्द्र है। चूंकि यह गुवाहाटी शहर के बीचों-बीच स्थित है, इसलिए यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि पार्वती की एक अन्य रूप देवी उगरा तारा इसी मंदिर में रहती है। मंदिर के गर्भ गृह में देवी की कोई प्रतिमा नहीं है। इसके स्थान पर पानी से भरा एक छोटा सा गड्ढा है जिसे देवी समझ कर उसकी पूजा-अर्चना की जाती है |

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