चमत्कारी स्थल अलवर के पांच प्रमुख आकर्षण

0

1) नालदेश्वर

नालदेश्वर, अलवर शहर से 24 किमी दूर दक्षिण में स्थित है। यह सुरम्य गांव अपने प्राचीन महादेव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यह पत्थर की चोटियों और सुंदर हरियाली से चारों ओर से घिरा हुआ है। इस मंदिर में एक प्राकृतिक शिवलिंग है जिसकी बड़ी संख्या में भक्त वर्ष भर पूजा करते हैं। पर्यटक यहाँ दो प्राकृतिक तालाब भी देख सकते हैं जिनमें पास की पहाड़ियों से पानी आता है। मानसून की पहली बारिश के बाद इस स्थान की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है।

2) त्रिपोलिया

त्रिपोलिया एक उत्कृष्ट वास्तुशिल्प कृति है जिसका निर्माण ईसा पश्चात 1417 में योद्धा सुबेर पाल की याद में किया गया। यह एक चपटी गुंबददार संरचना है जिसके प्रत्येक ओर उल्लेखनीय द्वार हैं। यह स्मारक अलवर के व्यस्त क्षेत्र में है। इसके उत्तर में मुंशी बाज़ार, दक्षिण में मालाखेड बाज़ार और दक्षिण में सराफा बाज़ार है। सभी पुराने बाज़ार सोने के गहनों और कपड़ों के लिए प्रसिद्ध हैं। इस बड़ी छतरी में पूर्वी छोर पर एक प्रभावशाली महादेव मंदिर है जो पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। इस स्मारक में एक संग्रहालय भी है जहाँ बड़ी मात्रा में सुबेर पाल के समय की कलाकृतियों का संग्रह है।

3) कंपनी बाग़

कंपनी बाग़ एक सुंदर उद्यान है, हरियाली और आकर्षक लॉन इसका गौरव है एवं यह चारों ओर से सैर करने वाले विशाल स्थानों से घिरा हुआ है। यह अलवर के ध्यान आकर्षित करने वाले स्थलों में से एक है। इस बाग़ को राजा शिव दान सिंह ने ईसा पश्चात 1868 में बनवाया था। देश के मरूस्थलीय क्षेत्र में स्थित, यह प्रचुर हरियाली थार मरूस्थल के मध्य में एक सुखदायक स्थल के रूप में भी जानी जाती है। इस उद्यान में विशिष्ट बंगाली शीर्ष और मोड़ के साथ एक “छतरी” भी स्थापित की गई है। इस उद्यान में एक प्रमुख संरचना भी है जिसे शिमला हाउस कहा जाता है और यह अपने बड़े वॉल्ट( गुफा, खोह) आकार के लिए प्रसिद्ध है।

4) कलाकंद बाज़ार

कलाकंद बाज़ार खरीददारों के लिए एक आनंद है जो मुँह में पानी लाने वाले मीठे व्यंजनों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इस बाज़ार में कई विभिन्न गलियाँ है जिनके नाम इनमें मिलने वाले प्रसिद्ध व्यंजनों के नाम पर रखे गये हैं। पर्यटक आस पास की दुकानों में आकर्षक हस्तकला एवं आभूषण उचित कीमतों पर खरीद सकते हैं। इस बाज़ार के खरीददारी के क्षेत्र सराफा बाज़ार, बजाजा बजार, होप सर्कस, केडालगंज बाज़ार और मालाखेडा बाज़ार के नाम से भी जाने जाते हैं। यह बाज़ार मंगलवार को छोडकर पूरे सप्ताह खुला रहता है।

5) बाला किला

बाला किला जिसे अलवर किले के नाम से भी जाना जाता है, अलवर शहर में एक पहाड़ी पर स्थित है। इस किले का निर्माण ईसा पश्चात वर्ष 1550 में हसन खान मेवाती ने करवाया था। यह स्मारक अपने चिनाई के माक और भव्य संरचनात्मक डिज़ाइन के लिए प्रसिद्द है। यहाँ छह प्रमुख द्वार हैं जो इस प्रकार हैं, जय पोल, लक्ष्मण पोल, सूरत पोल, चाँद पोल, अंधेरी द्वार और कृष्णा द्वार जो किले की ओर जाते हैं। किले की संपूर्ण संरचना उत्तर से दक्षिण की ओर 5 किलोमीटर और पूर्व से पश्चिम की ओर 2 किलोमीटर तक फ़ैली हुई है।

टिप्पणियाँ लिखे

आपका ईमेल प्रकाशित नहीं किया जाएगा।