पाटन – सोलंकी शासन के दौरान गुजरात की राजधानी

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गुजरात की गढ़वाली पूर्व राजधानी, पाटन एक ऐसा शहर है जिसकी स्थापना 745 ईस्वी में की गई थी। तत्कालीन राजा वनराज चावड़ा द्वारा निर्मित यह पुरातन ऐतिहासिक शहर अपनी उत्कृष्ट ऐतिहासिक सम्पदाओं और प्राकृतिक भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। अहमदाबाद के नज़दीक स्थित ये शहर घूमने के लिए बेहतरीन स्‍थलों में से एक है। अहमदाबाद में या इस शहर के आसपास रहने वाले लोग पाटन घूमने आ सकते हैं। अपनी उत्कृष्ट प्राचीन वास्तुकला और प्राचीन सौंदर्य के लिए मशहूर पाटन में कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण पर्यटक स्‍थल मौतूद हैं। ये स्‍थल इतिहास और एडवेंचर प्रेमी दोनों के लिए ही महत्‍वपूर्ण हैं।

मध्ययुगीन काल के दौरान कभी गुजरात की राजधानी रह चुका, पाटन आज बीते युग की एक गवाही के रूप में खड़ा है। पाटन 8वीं सदी के दौरान, चालुक्य राजपूतों के चावड़ा साम्राज्‍य के राजा वनराज चावड़ा, द्वारा बनाया गया एक गढ़वाली शहर था। महाराज भीम की रानी उद्यामती का बनवाया भवन खंडहर अवस्था में अब भी विद्यमान है। नगर के दक्षिण में एक प्रसिद्ध खान सरोवर है। एक जैन मंदिर में वनराजा की मूर्ति भी दर्शनीय है। नवीन पाटन मराठा लोगों के प्रयास का फल है। यह सरस्वती नदी से डेढ किमी की दूरी पर है। जैन मंदिरों की संख्या यहाँ एक सौ से भी अधिक है, पर ये विशेष कलात्मक नहीं हैं। खादी के व्यवसाय में इधर काफी उन्नति हुई है।

पाटन कैसे पहुंचे

वायु मार्ग द्वारा:
पाटन पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा अहमदाबाद में स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल हवाई अड्डा है, जो इस ऐतिहासिक शहर से लगभग 120 किमी दूर है।

रेल मार्ग द्वारा:
पाटन रेलवे स्टेशन शहर के केंद्र में स्थित है और देश के विभिन्न प्रमुख मार्गों से ट्रेनों द्वारा जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग द्वारा:
पाटन नियमित बसों के माध्यम से भारत के अन्य प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। शहर के केंद्र में स्थि‍त इसके बस टर्मिनल पाटन बस जंक्शन से नियमित बसें उपलब्ध हैं।

पाटन आने का सही समय

पाटन की यात्रा का सबसे अच्छा समय सितंबर से फरवरी में सर्दियों के महीनों में रहता है। इस समय यहां का तापमान औसतन 15 डिग्री सेल्सियस से 25 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।

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