प्रकृति की असीम कृपा के तहत बसा है चंदेल और इसके आसपास का पर्यटन

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चंदेल ज़िले पर प्रकृति की असीम अनुकम्पा है और यहाँ पर कई प्रजाति के पेड़ पौधे और जीव जंतु पाए जाते हैं। यहाँ पर विशेष रूप से आर्किड और सजावटी पौधे भी मिलते हैं। ऐसे ही कुछ अनूठे पेड़ हैं: अनिसोमेलेस इंडिका, अनोटिस फोएटीडा और क्रासिफालम क्रेपीडायोड्स। इसके अलावा यहाँ कई आयुर्वेदिक जड़ी बूटियाँ भी हैं जिनका इस्तमाल आयुर्वेद में किया जाता है।

चंदेल ज़िले में कुछ अनूठे जानवर भी पाए जाते हैं जिसमें से हूलोक गिबन नाम का बन्दर है जो भारत में सिर्फ इसी ज़िले में पाया जाता है। यहाँ पर आप स्लो लोरिस, डगमगा कर चलने वाला छोटे पूँछ वाला बन्दर, सूअर की जैसी पूँछ वाला बन्दर भी देख सकते हैं। इस ज़िले में आपको निशाचर मांशाहारी पशु जैसे चीता और सुनहरी बिल्ली भी देखने को मिलेंगी। पास के देश म्यांमार से हाथी भी यहाँ ठण्ड से बचने के लिए पलायन कर आते हैं।

चंदेल के आस पास के पर्यटन स्थल

इस ज़िले का एक महत्वपूर्ण शहर है मोरेह जो म्यांमार का प्रवेश द्वार भी है। मोरेह को मणिपुर के अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय का केंद्र भी माना जाता है। यह चंदेल शहर से करीबन 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चंदेल की दूसरी मन लगने वाली जगह है तेङ्ग्नोउपल क्योंकि यह भारत-म्यांमार सड़क का सबसे उंचा बिंदु है। यह जगह जो चंदेल से करीबन 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, मनिपुर इलाके का सुन्दर नज़ारा पेश करती है।

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