बुलंदशहर के गांवो में बसी है इस शहर की खूबसूरती

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चूंकि बुलंदशहर का इतिहास प्राचीन काल से मिलता है, इसलिए पूरे जिले में भटोरा वीरपुर और गालिबपुर सहित अन्य जगहों पर कई खंडहर देखे जा सकते हैं। इनमें से चोला, अहर और वलीपुरा घूमने लायक जगह है। चोला एक छोटा सा गांव है, जो बिबकोल पोलियो टीका कंपनी के लिए प्रसिद्ध है। कर्णवास एक ऐतिहासिक महत्व का स्थान है, जिसका नामकरण महाभारत के नायक कर्ण के नाम पर हुआ है। वलीपुरा गांव की प्राकृतिक सुंदरता बेजोड़ है। एक नदी के किनारे पर बसा यह गांव यहां स्थित वन चेतना केन्द्र के लिए भी जाना जाता है। आप चाहे तो सिकंदराबाद भी घूम सकते हैं। इसे सिकंदर लोदी ने बसाया था और यहां कई प्रचीन स्मारक भी हैं। अन्य शहरों की तरह बुलंदनशहर में भी कई मंदिर और धार्मिक स्थल हैं। इन्हीं में से एक है बेलोन स्थित बेलोन मंदिर।

अनूपशहर

इतिहास से पता चलता है कि अनूपशहर की स्थापना बड़गूजर राजा अनूप राय ने 1605 से 1628 के बीच करवाया था। जिस समय अनूपशहर की स्थापना की गई थी उस समय मुलग साम्राज्य में बादशाह जहांगीर की हुकूमत थी। एक पौराणिक कथा के अनुसार जब बादशाह जहांगीर शिकार पर निकले थे तब अनूप राय ने एक शेर से उनकी जान बचाई थी। इससे खुश होकर जहांगीर ने अनूप राय को कुछ जमीन दान में दे दी थी, जिसपर उन्होंने एक शहर बसाया और एक किले का भी निर्माण करवाया। राजा अनूप राय की आठवीं पीढ़ी के राजा तारा सिंह के शासनकाल में अनूपशहर ने खूब प्रसिद्धि हासिल की और आयुर्वेदिक दवाईयों का महत्वपूर्ण केन्द्र बन गया। बाद में आजादी की लड़ाई में अनूपशहर से विद्रोह के कई बीज फूटे। यह शहर छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह गंगा नदी के किनारे पर स्थित है और यहां कई मंदिर वे गेस्ट हाउस हैं, जिसकी संरचना काशी से काफी मिलती-जुलती है।

वलीपुरा

गंगा नदी के किनारे बसा वलीपुरा एक खूबसूरत गांव है। गांव के पास में ही बने वन चेतना केन्द्र के लिए इसकी खासी प्रसिद्धि है। इस केन्द्र का प्रबंधन उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा किया जाता है।

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