शांति और सुकून चाहने वालों के लिए स्वर्ग है दमन

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दमन, गोवा और दादरा एंव नगर हवेली 450 साल से भी ज्यादा समय के लिए पुर्तगाली साम्राज्य का हिस्सा रहा। 19 दिसंबर 1961 में दमन और अरब सागर में विदेशियों के अधीन दूसरे तटवर्ती क्षेत्रों को भारत में मिला दिया गया। हालांकि 1974 तक पुर्तगाल दमन व अन्य क्षेत्रों को अपना ही हिस्सा मानता था। 1987 तक गोवा, दमन व दीव मिलकर एक केन्द्रशासित प्रदेश था। बाद में गोवा को अलग राज्य का दर्जा दे दिया गया। वहीं दमन व दीव आज भी केन्द्रशासित प्रदेश ही है। दमन व दीव एक दूसरे से 400 किमी की दूरी पर है।

दमन हमेशा से ही अलग-अलग जाति और संस्कृति का संगम स्थल रहा है। इन सभी ने आपस में मिलकर इसे एक खास बहुरंगी पहचान दिया है। अरब सागर के 12.5 किमी लंबे समुद्री किनारे पर इतराने वाला यह केन्द्रशासित प्रदेश शांति और सुकून को पसंद करने वालों के लिए स्वर्ग से कम नहीं है। दमन में ऐसे पर्यटक बड़ी संख्या में आते हैं, जिन्हें प्रकृति से लगाव होता है। वे यहां के शांत और मैत्रीपूर्ण वातावरण में आनंद से भर जाते हैं। यह शहर दमनगंगा नदी से मोती दमन (बड़ा दमन) और नानी दमन (छोटा दमन) में बंटा हुआ है।

दमन – सांस्कृतिक विविधता
दमन पर्यटन का सांस्कृतिक स्वरूप जनजातीय, शहरी, यूरोपीय और भारतीय परम्पराओं को मिश्रण है। इस जिले की बहुत ही समृद्ध विरासत है। यहाँ के निवासी नृत्य और संगीत को विशेष महत्व देते हैं। इस जगह की शान्त सुन्दरता के साथ-साथ आप दमन के समुद्रतटों पर गुनगुनी धूप का आनन्द भी ले सकते हैं।

कैसे पहुंचे दमन
अहमदाबाद और मुंबई जैसे नजदीकी शहर से दमन आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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